कविता " पति-पत्नी का होता है "




पति-पत्नी का होता है


"इस रचना के द्वारा पति और पत्नी के प्रेम का ज़िक्र किया गया है"


पति-पत्नि का होता है
बड़ा ही प्यारा सा रिश्ता
एक जन्म की बात नहीं
ये जन्मों-जन्मों का नाता
लड़की छोड़कर के आती
मायके का हर रिश्ता
कुछ ही दिनों में बेगाना घर
अपना घर बन जाता
लड़की के माँ-बाप को भी
बेटा नया मिल जाता
साले-साली के संग मन
लड़के का बहुत लग जाता
दो परिवारों की जिम्मेदारी
दोनों ही मिल के उठाते
जरूरत पड़ने पर दोनों
एक दूजे के दोस्त बन जाते
सामने जब हों रहते
तो बता नहीं हैं पाते
प्रेम है कितना एक दूजे से
जुदाई का एक-एक पल समझाता
पत्नी तड़के से उठकर ही
नाश्ता,लंच पति का बनाती
फिर शाम आते ही नजरें
उसकी दरवाजे पे टिक जाती
पति भी दिन भर बाहर रहकर
रोजी-रोटी कमाता
और जब घर पर वापस आता
चीजें पसंद की लाता
कभी-कभी छोटी बातों पर
उनका झगड़ा हो जाता
एक जो मुँह को फूला के रखता
तो दूजा मूंड बनाता
जब दूर रहना पड़े तो
जी इनका घबराता
ना कुछ अच्छा सा लगे
 खुशियों में भी मन ना लग पाता
लम्बी आयु के लिए पति की
पत्नी तो व्रत है करती
पति भी अपनी अर्धांगिनी के
विश्वास को तोड़ ना पाता
कहने को तो बच्चे भी 
जीवन में हैं सबके ही आते
पर अंत समय पर ये दोनों ही
एक दूजे का साथ निभाते
साथ हमेशा ऐसे रहते
जैसे हों बाती और दीया
पति-पत्नि का होता है
बड़ा ही प्यारा सा रिश्ता
एक जन्म की बात नहीं
ये जन्मों-जन्मों का नाता
 
अर्चना





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