अपनी छब बनाई के ,

 

अपनी छब बनाई के ,जो मैं पी के पास गयी 

जब छब देखी पिहु की 

जब छब देखी पिहु की 

खुद अपनी भूल गयी 

 अपनी छब बनाई के जो मैं पी के पास  गयी 


वो ही तन में,वो ही मन में , वो ही हैं दिल की धड़कन में 

वो ही तन में,वो ही मन में , वो ही हैं दिल की धड़कन में 

जब उनको ना देखूँ तो लगता है जीना भी मरने 

उनको मैं बतलाऊँ कैसे ,उनको मैं बतलाऊँ कैसे 

वो हैं दीया मैं बाती 

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वो ही चूड़ी वो ही पायल ,वो ही हैं आँखों का काजल 

वो ही चूड़ी वो ही पायल ,वो ही हैं आँखों का काजल 

उन से ही शृंगार सभी और वो ही करें नैनों से घायल 

उनको में बतलाऊँ कैसे , उनको में बतलाऊँ कैसे 

वो हैं  बादल मैं बिज़ूरी 

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वो ही साथी वो ही हमदम ,वो ही हैं होठों की सरगम 

वो ही साथी वो ही हमदम ,वो ही हैं होठों की सरगम 

जब मैं कोई दर्द छुपाऊँ ,उनकी नज़रें पढ़ लें एकदम 

उनको मैं बतलाऊँ कैसे , उनको मैं बतलाऊँ कैसे 

वो हैं फूल मैं तितली 

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