अंधविश्वास पर कविता "कुछ बाबाजी "


अंधविश्वास पर कविता


"कुछ बाबाजी"

भोले - भाले लोगों को 
कुछ बाबजी रोज हैं ठगते
साइन्स के एक्सपेरिमेंट दिखा
खुद को भगवान बताया करते

पर अंदर से ये बहुत मेले 
अत्याचार महिला पर करते 
बाहर से दिखावे के लिए
ब्रह्मचर्य का पालन करते 

जितना धन ना उद्द्योग्पतियों पर
खजाने इनके पास में मिलते
आश्रमों में इनके ही तो 
लाठी ,तमंचे और बंदूके मिलते

ऐसे लोग ही औरत को 
पुत्र प्राप्ति की दवाएं देते
पुरुषों में होते ये जीन्स
 अनपढ़ , गंवार कहाँ समझते

पहन कर के केसरिया चोला 
रूप नये -नये हैं धरते 
बगल में तो होता चाकू
 होंठ से राम जपा करते 

भूत-प्रेत के अस्तित्व को
ये ही हैं बढ़ावा देते
खुद जीते फाइव स्टार की जिंदगी
जनता से नेम- व्रत करवाते

ऐसे पाखंडी लोगों के 
ना बहकावे में कभी भी आना
वर्ना तन , मन और धन से
होगा इनके ही आधीन हो जाना




विश्वास पर कविता पढ़ें 
"मैं हूँ वो मन का विश्वास"







दोस्ती पर कविता | poem on friendship

दोस्ती पर कविता | poem on friendship

दोस्ती  पर कविता | POEM ON FRIENDSHIP


                           ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता

ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता
यूं इस तरह से मुझे छोड़ के ना जा
जो वादा तेरा मुझसे हुआ कभी 
कुछ भी करके तू वादे को दे निभा
ऐ दोस्त तुझे दोस्ती का वास्ता

क्या भूल गया साथ में बिताई जो सुबहें
जब नंगे पाँव साइकल के टायर से खेलते
कभी बूढ़े बाबा तो कभी बनिए को चिढ़ाते
मस्त मगन हम दोनों मोज किया थे करते 

साथ -साथ पेड़ों पर थे कूदते -लटकते  
मौका मिलने पर अमरूद लेकर के खिसकते
एक अमरूद का भी मिल बांटकर खाना 
अपनी यारी की मिसालें देता था जमाना

जब इंटरव्यू की कतार में हम दो ही थे बचे 
तू ने कहा "भाई तू चला जा " लग कर के गले
तू ही था परछाई हर कदम पर मेरे
अब क्यो हार मान रहा देदे  मौत को तू शह

ऐ दोस्त मुझे भी है दोस्ती का वास्ता
मुझको हमेशा चाहिए एक हमसफर तेरे सा 
जीते जी मिले या मुझे भी दम हो हारना
नहीं थमेगा कभी अपनी दोस्ती का कारवां 





दोस्तों मैं आशा करती हूँ के आपको ये " दोस्ती पर कविता" पसंद आई होगी | ऐसी एक और कविता नीचे दिये लिंक पर क्लिक कर पढ़ें|


"एक दोस्त होना चाहिए"






दिल पर कविता | poetry on heart

 दिल पर कविताएं 

दोस्तों ये जो दिल है ना ,कहते हैं बड़ा ही पागल होता है|ये जानकार भी कि अगर आपने किसी से दिल लगाया तो आपको बहुत सारी परेशानियां हो सकती हैं मगर ये कहाँ मानता है | दिल की कुछ नादानी और बचकानी हरकतों को बयान करती यह दो कवितायें पढ़िये| |



जब दो दिल मिल गए



जब दो दिल मिल गए
  कुछ ख़्वाब ऐसे बुन गए
अब हसरतें जगने लगीं
और दर्द पुराने गुम गए

हर तरह कलियाँ खिलीं
हवाएँ रेशम लगने लगीं
हर जर्रे में महबूब ही दिखे
अब खुद पे जोर न चले

कभी बात-बात पे हँसें
हर आहट पे ये दिल रुके
अब तेरे दिल की धड़कनें
 मेरे दिल में लगी हैं गूंजने






 दिल का रिश्ता

जो तुझसे दिल का रिश्ता है
उसे नाम मैं ना दे सकूँ
बस दूर से यही चाहता 
तुझे पास महसूस कर सकूँ  

पता मुझे यह अच्छे से

 मिलन नहीं होना ये कभी
क्यूंकि तू बंधा हुआ है
 दुनिया की रस्मों,रिवाजों से

बस तेरी तस्वीर के आगे

 मैं रोज इनायत करता हूँ
तू ही सबकुछ है लेकिन
तेरे सामने पराया बनता हूँ


दिल की और सुनने का मन करे तो यह
गीत भी पढ़ सकते हैं :- "जब दिल दीवाना होता है "









हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "

हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "





अपने बच्चे कम थे क्या 
कि पड़ोस के भी आ गए
अब तो लगता है जैसे
मेरे बच्चों के भी भाव बड़े
कभी मांगते चिप्स के पैकेट
और कभी मांगते कुरकुरे
नींद तो पहली ही कम मिलती 
अब होश भी हैं मेरे उड़ गए 
न जाने शाम तक आते-आते
कितनी बार बर्तन धोने पड़ें
घर को बनाया जंग का मैदान
अब दीवारों पर चित्रकारी करने बढ़े


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बच्चों पर एक और कविता पढ़ें



हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"



हास्यकविता हमारी नैनीताल यात्रा

हास्यकविता "हमारी नैनीताल यात्रा"

☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂☂

जनवरी के महीने में हमने
नैनीताल का प्लान बनाया
सोचा था के नई साल पर
छुट्टियों का जाये लुफ्त उठाया
पर हो गयी बहुत बड़ी गड़बड़
रात में आ गयी बारिश झर-झर
गये थे हम छोटे बच्चों को लेकर
बहुत पछताए फिर वहां जाकर 
बच्चों को लग गयी उल्टियां
और कहीं भी न घूमे हम
 ख़राब मौसम चलते नावें बंद हो गई 
ताल की सैर भी न कर पाए हम
होटल के कमरे में सारा दिन बीता
न पहुंचे भीमताल न पहुंचे मुक्तेश्वर
अगले दिन फिर बैग उठाके
वापस आ गए घर को हम

😄😄😄😄😄😄😄😄



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हास्य कविता "बबलू भैया की कार "



हास्य कविता "बबलू भैया की कार "




बबलू भईया गाँव चले
नई कार में खूब जचे
चश्मे,टोपी में चमकें
स्टाइल दिखाये बिना नहीं रुके
तीन घंटे में जब गाँव पहुंचे 
उन्हें देख बच्चे उछले
भईया ख़ुशी से बहुत अकड़े
सोचे बच्चे कितना याद करें
पर बच्चे निकल गए साइड से
गाड़ी पर  सब जा चिपके
कोई  बैठा छत पे  चढ़ के
कोई शीशे में चेहरा देखे
कोई  वाईपर को खींच रहा
बाकि के सीटों पर कूदें
ये सब देख भईया चौंके
कोई भी न चाय -पानी पूंछे
भीड़ लगा बस कार तकें
ऊपर से गर्मी थी भयंकर
पसीना तर-तर था टपके
फैंका चश्मा और सूट फैंक के
भईया वहां से रफुचक्कर हुए







सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"


सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"




दोस्तों इस पोस्ट सेल्फी पर हास्य कविता हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी में मैंने अपनी यात्रा के दिलचस्प अनुभव बताए हैं |जो आपको गुदगुदाएंगे|



सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"



सेल्फी पर हास्य कविता" हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी"


हंसती-सेल्फी रोती सेल्फी
उठते-सेल्फी सोते सेल्फी
बड़े-छोटे सब लेते सेल्फी
मुझको भी यह लत लगी

पहाड़ पर सेल्फी पानी में सेल्फी
पाउट बना बना करना मस्ती
नए- नए से पोज़ देने के चक्कर  में
आईस-क्रीम कपड़ों पर पिघल गिरी

इंडिया-गेट पर सेल्फी मेले में सेल्फी
चांहू फ्रेंड से भी बढ़कर अपनी डी.पी. 
भीड़-भाड़ और सेल्फी के चक्कर में 
ना जाने कब मेरी जेब कटी

लेकिन चांहे कुछ भी हो जाये
छुटती नहीं ये व्याधा गले पड़ी
स्वप्न में भी कल ले ली मैंने
अप्सराओं के संग में सेल्फी

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भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई

भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई 



भाई के लिए एक प्यारी कविता | छोटा सा है मेरा भाई


छोटा सा है मेरा भाई 
बातें लेकिन बड़ी बनाये
तुतला के ऐसे है बोले 
आधों के समझ न आयें 

मटक-मटक के नाच दिखाता 
सारे घर का दिल बहलाता
रीदी-रीदी कह कर मुझसे
मेरे पीछे भागा आता

जब भी कोई त्योहार आता  
वो तो बहुत खुश हो जाता
नये- नये कपड़े पहनकर
बहुत सी फोटो खिंचवाता 

लड़ता भी है जी भर मुझसे 
पर दो पल में मान भी जाता
जब ना होता घर के अंदर 
वीराना सा घर हो जाता

मेरे प्यारे भैया तुझे 
कोई गम ना कभी सताये
भगवान करे के किस्मत तेरी
सूरज से भी ज्यादा चमक जाए 



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हास्यपूर्ण कविता "एक दोस्त की शादी पर "



एक दोस्त की शादी पर 
दूसरे ने जबर्दस्त खुशी मनाई 
किसी के कारण पूछने पर
बोला लो इसकी भी शामत आई 

इसने मेरा व्यंग बनाया
घड़ी-घड़ी था मुझे चिढ़ाया
आज घोड़े पर शान से है बैठा
जिएगा फिर तो गधे की लाइफ

मुझको कहता था "जोरू का गुलाम,
बिन भाभी इजाज़त कर ले कुछ काम" 
तब समझेगा मेरे मन की पीड़ा
जब पॉकेट पे होगी मेडम की लगाम

सब को है बेशक ये पता
बिन पत्नी घर में न पत्ता हिलता 
फिर भी अपने को मुखिया मानकर
करते रहते बस झूठी बड़ाई 
देखो इसकी भी शामत आई











कृष्ण जन्म बधाई गीत "आओ सखियों दे दें बधाई"



कृष्ण जन्म बधाई गीत "आओ सखियों  दे दें बधाई"


आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है
नाचे जाएँ खुशी मनाएँ 
वो जगत दुलारा आयो है


लड्डू लाओ मिस्री लाओ
आकर इसको भोग लगाओ
वस्तर लाओ पैजनी लाओ
आकर इसको रूप सजाओ 
पर काला टीका ना भूल जाना
पर काला टीका ना भूल जाना
मेरा कान्हा बड़ा मनभावन है

आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है

बंसी लाओ मोरपंखी लाओ
ये दोनों इसको भावे हैं
गईया लाओ ग्वाले लाओ
लल्ला तो इन संग खेले है
पर गोपियों को भूल न जाना 
पर गोपियों को भूल न जाना 
मेरा कान्हा बड़ा ही चितचोर है 

आओ सखियों दे दें बधाई
आज नन्द के लाला आयो है
नाचे जाएँ खुशी मनाएँ 
वो जगत दुलारा आयो है




यह कृष्ण भजन भी पढ़ें









सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

सैनिकों के लिये कविता | हे वीर जवान

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
तुम से ही भारत की शान
तुम बलशाली , शौर्यवान
हँसते-हँसते तजते प्राण

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम


तुम पर्वत से भी अटल
बिजली जैसे तेजवान
तुम्हारी गर्जना सुन काँपते
थर-थर दुश्मनों के पाँव


हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम

हौंसला ऐसा बुलंद ,  तुम हो
 जल-थल,गगन में गतिमान
तुम ही बन जाते प्राणदायक
जब-जब देश में आता विपदाकाल 

हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम
हे वीर जवान तुम्हें प्रणाम


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कविता "दूर देश से आई बहना"

 रक्षाबंधन पर कविता 



दूर देश से आई बहना
छोटे भाई को बांधने डोरी
आज बहुत हर्षित लगती है 
पहनकर नई हरी साड़ी 

हाथ में पूजा की थाली लेकर
मन ही मन विनती करती 
रहे खुशहाल मेरा भैया 
 है मंगल कामना करती 

झट से फिर भईया ने भी 
अपनी कलाई आगे कर दी
राखी बँधने के बाद में दोंनो ने 
एक-दूजे को बरफी खिला दी

बहना के पैरों को छूकर 
भाई ने उपहार की पैकेट दी
गले लगाकर दीदी ने फिर
बहुत सारी आशीष दीं

हंस करके दीदीजी बोली
हमारे प्रेम में है शक्ति बड़ी 
कल तो थी मैं पड़ी बीमार 
आज सात समुंदर पार आ गई 

बहन -भाई का प्यार देख के
सब की आंखे खुशी से भरी 
रक्षाबंधन की बात निराली 
वैसे तो उत्सव होते हैं कई 


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औरत पर कविता "ऊंचा उड़ने की चाह"