कविता "दूर देश से आई बहना"

 रक्षाबंधन पर कविता 



दूर देश से आई बहना
छोटे भाई को बांधने डोरी
आज बहुत हर्षित लगती है 
पहनकर नई हरी साड़ी 

हाथ में पूजा की थाली लेकर
मन ही मन विनती करती 
रहे खुशहाल मेरा भैया 
 है मंगल कामना करती 

झट से फिर भईया ने भी 
अपनी कलाई आगे कर दी
राखी बँधने के बाद में दोंनो ने 
एक-दूजे को बरफी खिला दी

बहना के पैरों को छूकर 
भाई ने उपहार की पैकेट दी
गले लगाकर दीदी ने फिर
बहुत सारी आशीष दीं

हंस करके दीदीजी बोली
हमारे प्रेम में है शक्ति बड़ी 
कल तो थी मैं पड़ी बीमार 
आज सात समुंदर पार आ गई 

बहन -भाई का प्यार देख के
सब की आंखे खुशी से भरी 
रक्षाबंधन की बात निराली 
वैसे तो उत्सव होते हैं कई 


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6 comments:

  1. बहुत सुंदर भोली भाली मीठी कविता। बधाई स्वरूप प्रसिद्ध कवि गोपाल सिंह नेपाली की ये पंक्तियाँ आपको समर्पित करता हूँ:-
    गोपाल सिंह नेपाली गोपाल बहादुर सिंह लेखक को जानिए

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    कविता
    भाई-बहन
    गोपाल सिंह नेपाली


    तू चिनगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूँ,
    तू बन जा हहराती गंगा, मैं झेलम बेहाल बनूँ,
    आज बसन्ती चोला तेरा, मैं भी सज लूँ लाल बनूँ,
    तू भगिनी बन क्रान्ति कराली, मैं भाई विकराल बनूँ,
    यहाँ न कोई राधारानी, वृन्दावन, बंशीवाला,
    तू आँगन की ज्योति बहन री, मैं घर का पहरे वाला ।

    बहन प्रेम का पुतला हूँ मैं, तू ममता की गोद बनी,
    मेरा जीवन क्रीड़ा-कौतुक तू प्रत्यक्ष प्रमोद भरी,
    मैं भाई फूलों में भूला, मेरी बहन विनोद बनी,
    भाई की गति, मति भगिनी की दोनों मंगल-मोद बनी
    यह अपराध कलंक सुशीले, सारे फूल जला देना ।
    जननी की जंजीर बज रही, चल तबियत बहला देना ।
    भाई एक लहर बन आया, बहन नदी की धारा है,
    संगम है, गंगा उमड़ी है, डूबा कूल-किनारा है,
    यह उन्माद, बहन को अपना भाई एक सहारा है,
    यह अलमस्ती, एक बहन ही भाई का ध्रुवतारा है,
    पागल घड़ी, बहन-भाई है, वह आजाद तराना है ।
    मुसीबतों से, बलिदानों से, पत्थर को समझाना है


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    1. बहुत सुंदर कविता बताई आभार |

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  2. सबसे प्यारा सबसे न्यारा भाई बहन का प्यार
    बहुत सुन्दर रचना

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  3. क्या बात है !! सरस संवाद से भरी सरल सी सुंदर रचना -- राखी पर्व की हार्दिक बधाई ------

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  4. सब मित्रों का आभार व रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ |

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