आज खुशी आँखों में छलक आई है

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दोस्तों आज की कविता उस पत्नी की मनो स्थिति को बयान कर रही है जिसका फौजी पति दो दिन बाद दुश्मन के चंगुल से वापस घर लौटता है|



"आज खुशी आँखों में छलक आई है "

आज खुशी आँखों में छलक आई है
लगा वापस जिंदगी पाई है
यह मनहूस दो दिन की घड़ी
मैं जानूँ मैंने कैसे बिताई है 


तुम्हारे शौर्य पर मुझे पूरा यकीन था
लेकिन दुश्मन भी बड़ा जालिम था
तुमने इतने समय तक निर्भय रह कर
भारत माँ की फिर से शान बचाई है
आज खुशी आँखों में छलक आई है 


बच्चों को भी मैंने यह समझाया था
तुम्हारा पिता एक द्र्ड पर्वत सा है
सही सलामत वापस आकर तुमने
परिवार की मुस्कुराहट वापस लाई है
आज खुशी आँखों में छलक आई है 


कैसे बताऊँ मैंने वक्त कैसे काटा था
चेहरे पर स्वाभिमान फौजी की पत्नी का था
लेकिन मैं भी इंसान हूँ अंदर से मेरा भी कलेजा काँपा था
शायद माता- पिता की आशिषे तुम्हें वापस ले आई हैं

आज खुशी आँखों में छलक आई है 

आज खुशी आँखों में छलक आई है 

आज खुशी आँखों में छलक आई है 







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