कविता"काम नहीं कोई छोटा"


काम नहीं कोई छोटा 


"इस कविता में एक छोटा काम करने वाले इंसान के जीवन के विषय में लिखा गया है"


काम नहीं कोई छोटा होता 
बस सोचने का नजरिया होता 
छोटे- छोटे कामों को करके ही
यकीनन ही इसांन बड़ा होता

छोटे काम में ना कोई बुराई है
मेहनत करके ही तो खाई है
दर दर तो नहीं है वो भटका
स्वाभिमान को अपने जिंदा रखा
सोता चैन की नींद भी वो क्योंकि
दो नम्बर की ना उसपे कमाई है

वो नहीं फिजूल खर्चे करता
घर में ही है मनोरंजन करता
खाता वो भी है दाल रोटी
लेता इसी हवा को वो भी
प्रभु से करता शुक्रिया जो भी है
दिया और बजाता है सुख की बंसी 

(अर्चना)





कविता " आओ होली जम कर खेलें"


आओ होली जम कर खेलें



आओ होली जम कर खेलें
गिले-शिकवे सब को भूलें
और जीवन रंगीन बनाएं
सबको ऐसे गुलाल लगाऐं

क्यों ना आने-जाने वालों को हम
आज अपनी पिचकारी से नहलाऐं
भांग की ठंडाई इतनी पिलाए कि
वो झूमता दिन भर  ही जाये

आज पड़ोस की भाभी से भी
थोड़ी हँसी ठिठोली कर आयें
मेक अप के ऊपर थोड़ा सा
गोल्डन कलर का टच दे आयें

डाँटने वाले अँकल से हम
बाॅल नहीं आशिष ले आयें
बहुत सताया हमने साल भर
रंग लगा के आज पैर छू आयें

गली के छोटे- छोटे बच्चों की
आज बड़ी- बड़ी मूँछ बनाये
पर याद रहे कि गुब्बारे से 
चोट किसी को ना लग पाये

गुजिया और दही भलले खाकर
हंसी-खुशी सब होली को मनाऐं
तो फिर बहुत मजा आ जाये
तो फिर बहुत मजा आ जाये

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कविता"आ जाओ सनम देखो "


आ जाओ सनम देखो हम तो
तरसे हैं
बाकि इस दुनिया में 
सारे हर्षे हैं
परदेस में तुमको
दिन बहुत हुए हैं
इंतजार में तुम्हारे 
नैना थक गये हैं
आ जाओ सनम देखो हम तो
तरसे हैं

कलियाँ जो खिल गयीं
तो भँवरा भी
गुनगुना उठा
मैना की पुकार पे
तोता मुसकुराता
हुआ आ गया
देखो सनम अब ना
हम सब् कर पाएं
देखो सनम अब ना
हम सब् कर पाएं
रूठ गये इस बार
तो तुम रहोगे पछताये
हाँ रहोगे पछताये

देखो त्यौहार अब
रंगों का 
आ गया
ले आओ तुम 
नौकरी से
थोड़ी सी
छुट्टियां 
हम तो सिर्फ तुम्हारे 
प्रेम में रंगना चाहें
हम तो सिर्फ तुम्हारे 
प्रेम में रंगना चाहें
के बिन तुम्हारे कोई
खुशी नही भाए
हमें खुशी नही भाए