कविता " इतना उदास तू कयूं होता "




इतना उदास तू कयूं होता 

जो इक सपना तेरा टूट गया 

मंजिल अभी बहुत बाकी हैं

बस तू कदमों को बढ़ाये जा

दीवार पर चढती चींटी को देख

गिरके उठना उससे सीख जरा

पांचों तत्वों से तू भी है बना 

नहीं कम तू किसी से जान जा

लगा कर पंख आशाओं के तू

सफलता के आकाश में घूम के आ

(अर्चना) 






कविता"पति- पत्नी"




पति- पत्नी 


पति- पत्नी होते जीवन साथी
साथ रहते जैसे दिया और बाती
यदि एक की कमी हो जाये
गृहस्थी पटरी से उतर जाती
पति से होता चूड़ि -कंगन
सौलह सिंगार पत्नी कर पाती
पति के घर वापस आने पर 
पत्नी फूलों सी खिल जाती
पत्नी होती है घर की लक्ष्मी 
वही घर को है मंदिर बनाती
उसके प्रेम की ताकत से ही
सभी मुश्किलें हल हो जातीं

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भजन"चल री सखी हम ब्रज को जाएं"



चल री सखी हम ब्रज को जाएं



चल री सखी हम ब्रज को जाएं
अब की होली कुछ ऐसी मनाएं 
रंग लें खुद को कान्हा के रंग में
और सारे दुख भूल जायें

जब गोविंद चलाता पिचकारी
बहती हैं अनेक सुख की नदियां
और रँग उड़ाता जब हवाओं में
महकता है ब्रज का कोना कोना 
हम भी उस आलौकिक दृश्य का
क्यों ना  सखी आनन्द  ले आएं
रंग लें खुद को कान्हा के रंग में
और सारे दुख भूल जायें

कहते हैं सब ही ये बात कि
कान्हा के नयन बड़े मदवाले 
हम भी कर लें भक्ति का नशा
ना भांग की फिर जरूरत पड़े
फिर तो अबकी होली में हम
जी भर कान्हा संग झूमे गायें
रंग लें खुद को कान्हा के रंग में
और सारे दुख भूल जायें

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