पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "


पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक ":

पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "
पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "


एक तनाव सा क्यूँ है रहता
पिछली और अगली पीढ़ी में
हर बात का बतंगड़ बनता 
पिछली और अगली पीढ़ी में
बाप सलाह दे बेटा न माने
देता केवल बस ये ताने
s:आप क्या जानो नया जमाना ?
मुझको बड़ी- बड़ी सोसाइटी में जाना
क्या मैं भी पहनू आप की ही हरह 
केवल साल में चार ही जोड़े
हंसी उड़ेगी सब में मेरी 
क्या आप चाहोगे ये सब होने ?
f:पर बेटा तू इतना फिजूल खर्चता 
क्यों नहीं फ्युचर का कुछ सोचता ?
अब अपनी मम्मी पर ही चिल्ला पड़ता 
क्या यह तुझको शोभा देता?
s:पापा आप भी तो हद करते हो 
दोस्तों संग एंजॉयमेंट को 
फिजूल खर्च कहते हो?
रात में थोड़ा लेट हो जाऊँ 
तो फोन कर -कर मुझे तंग करते हो|
f: चल में नहीं आज से फोन करूंगा
पर तुझसे ये वादा लूँगा कि 
ड्रिंक करके तुझे मैं कभी
कार चलाते हुए अब नहीं देखुंगा
तू सीट बेल्ट हमेशा पहन के रखेगा 
ड्राइव करते हुए किसी का फोन भी नहीं सुनेगा
s:ओके डेड्डी अब ऐसा ही होगा 
क्या अब आपके चेहरे पे स्माइल होगा ?
F:हंस कर फिर पापा ने माहोल को बदला
एक हांथ बेटे की कमर पर लगा दिया 
बोले " पिता होना तब तुझे भी पता चलेगा बेटा
          जब तू भी किसी का पापा बनेगा
         कितनी जिम्मेवारी है मुझ पर 
         तुझको भी यह एक दिन एहसास होगा "

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2 comments:

  1. पिता पुत्र के द्वन्द को बाख़ूबी लिखा है आपने ...
    ये घर घर की कहानी है वैसे तो ।..

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