ye jo safar he song on corona disease | corona bimari par ek gana |कोरोना सॉन्ग |one song on corona | कोरोना वाइरस पर गाना


ye jo safar he song on corona disease | corona bimari par ek gana | one song on corona | कोरोना वाइरस पर गाना | कोरोना सॉन्ग 

दोस्तो आज हम एक कोरोना सॉन्ग लाये है जो की बड़ा motivational है |
कोरोना सॉन्ग


ये जो सफर है सब हमसफर हैं
बैठे हैं घर पर क्योंकि फिकर है
न हांथ थामे बस लेते खबर हैं
फिर भी सब हमसफर हैं |

कांटेगे घड़ियां ये जो विकट हैं
खा लेंगे मिलके जो घर में बने है
परिवार के संग सब कुछ सरल है
क्योंकि सब हमसफर हैं |

अदृश्य शत्रु जो आया निकट है 
एक स्वच्छता ही अब हमारा शस्त्र है 
बस संयम है रखना दिखानी समझ है 
क्योंकि सब हमसफर हैं |

हम जीतेंगे बाज़ी ये पक्का पता है 
जो वादा खुदी से वो ही सबसे किया है 
हमें परिवार समाज और देश ही  नहीं 
 इंसानियत को बचाना है
इंसानियत को बचाना 

#gocorongo #coronasong #motivationalsong #hindisong 
friends आप ये गाना anchor.fm भी सुन सकते हैं लिंक नीचे है |
https://anchor.fm/archana-saxena/episodes/Motivational-Song-on-corona-disease-sab-hamsafar-hain-ebv5r7












माँ की याद में एक गीत "जब से मेरी माँ तू चली गयी"

माँ की याद में एक गीत "जब से मेरी माँ तू चली गयी"

माँ की याद में एक गीत "जब से मेरी माँ तू चली गयी"

ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
जब से मेरी माँ तू चली गयी
तब से होंठों की हंसी छिन गयी
पहले रहता था बन कर बे-फिकर
अब तो लगती है मुश्किल हर घड़ी
क्योंकि
तू तो थी दोस्त मेरी
तू तो थी हमदर्द मेरी
तुझ से कुछ भी..... ना .....छुपा
तू तो थी हमराज़ मेरी
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ 
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
जब कोई गलती मैंने की
तूने मुझे प्यार से सलाह दी
पाला मुझे जाने कितने नाज़ों से
गम की छाया तो बिल्कुल ना आने दी
क्योंकि 
तू तो थी दोस्त मेरी
तू तो थी हमदर्द मेरी
तुझ से कुछ भी..... ना .....छुपा
तू तो थी हमराज़ मेरी
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ 
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
इम्तहानों में ना आए नंबर मेरे बड़े
पर तूने मुझे कभी ना ताने दिये
बोला हंस कर के ना उदास हो बेटा
कल फिर आ जाएंगे जीवन में मौके नए
क्योंकि 
तू तो थी दोस्त मेरी
तू तो थी हमदर्द मेरी
तुझ से कुछ भी..... ना .....छुपा
तू तो थी हमराज़ मेरी
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ 
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
अब तो मन भी उदास है
दिखती ना कोई आस है
चुटकी में करदे जो सबकुछ हल 
वो फरिश्ता ना मेरे पास है
ओ माँ ..........................













prakriti par do kavitayein | hindi poems on nature

prakriti par do kavitayein | hindi poems on nature

prakriti par do kavitayein | hindi poems on nature


देखो हमारी प्रकृति 

कितनी सुंदर कितनी रंगमई
देखो हमारी प्रकृति
कहीं पेड़ तो कहीं नदी
देखो हमारी प्रकृति
कहीं मरु फैले हुए
कहीं उपवन से भरी
कहीं मंडराती तितलियाँ
कहीं शंखो से सजी
देखो हमारी प्रकृति
देखो हमारी प्रकृति
कहीं घुमड़ आए मेघ काले
कहीं तपति वसुधा भी दिखी
कहीं नाचते मोरों का झुंड
कहीं पर्वत पर शांत हवा बहती
देखो हमारी प्रकृति
देखो हमारी प्रकृति
इसमे गहरे रहस्य भी कई
कैसे है सीप सुंदर मोती देती
कैसे खिलता कमल कीच में
मीठा शहद कैसे मक्खी निर्मित करती ?
वाह- वाह हमारी प्रकृति 
वाह- वाह हमारी प्रकृति


अगर न होती प्रकर्ति    
                                         
सोचता हूँ मैं कभी
के अगर न होती प्रकृति
तो कैसे मिलती प्रेरणा
एक कवि को लिखने की
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
अगर न होती ये नदी
तो कैसे प्रेरणा मिलती
कल- कल बहना ना कभी रुकना
ये देती सीख सदा चलने की
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
अगर ना होते ये वृक्ष
तो कैसे प्रेरणा मिलती
वजन दार ही तो झुकता है
ये देते सीख समृद्ध होकर , भी विनम्र बनने की
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
अगर ना होते ये पुष्प
तो कैसे प्रेरणा मिलती
महकते रहते टूट कर भी
ये देते सीख सदैव खुश रहने की
हाँ सोचता हूँ मैं कभी
हाँ सोचता हूँ मैं कभी